
देशनोक (राजस्थान)। माँ करणी के पावन धाम देशनोक से शनिवार को 600 किलोमीटर लंबी सवर्ण न्याय यात्रा का विधिवत शुभारंभ हुआ। यात्रा की शुरुआत माँ करणी के दर्शन, पूजा-अर्चना और आशीर्वाद के साथ हुई। बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और श्रद्धालु इस ऐतिहासिक यात्रा में शामिल हुए।
आयोजकों के अनुसार, यह यात्रा यूजीसी एक्ट के विरोध तथा समाज की मांगों को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से सरकार और आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही है। यात्रा के दौरान विभिन्न शहरों में जनसंपर्क, सभाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से लोगों को आंदोलन के उद्देश्यों से अवगत कराया जाएगा।

यात्रा के शुभारंभ के दौरान एक विशेष और ऐतिहासिक क्षण भी देखने को मिला। मेवाड़ से संभाग अध्यक्ष डॉ. परमवीर सिंह दुलावत महाराणा प्रताप की वीरभूमि हल्दीघाटी की पावन मिट्टी लेकर देशनोक पहुंचे। इस मिट्टी को यात्रा के शुभारंभ से पहले विशेष सम्मान के साथ प्रस्तुत किया गया।
जानकारी के अनुसार, महिपाल सिंह मकराना ने इसी पावन मिट्टी से यात्रा में शामिल यात्रियों का तिलक कर उन्हें यात्रा के लिए रवाना किया। हल्दीघाटी की मिट्टी से तिलक को शौर्य, स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की परंपरा का प्रतीक माना गया। उपस्थित लोगों ने इसे महाराणा प्रताप के आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश बताया।
इस अवसर पर माँ करणी के जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा। समाज के लोगों ने यात्रा की सफलता, सामाजिक एकता और अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।
इस संबंध में जानकारी देते हुए शक्ति सिंह पंवार, जिला मीडिया प्रभारी, उदयपुर ने बताया कि मेवाड़ से हल्दीघाटी की पवित्र मिट्टी लाने का उद्देश्य महाराणा प्रताप के शौर्य और स्वाभिमान की प्रेरणा को सवर्ण न्याय यात्रा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल 600 किलोमीटर की पदयात्रा नहीं, बल्कि समाज के सम्मान, एकता और अधिकारों के लिए जनजागरण का अभियान है।
यात्रा अब अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ चुकी है और आगामी दिनों में विभिन्न शहरों से गुजरते हुए जनसंपर्क और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से अपने उद्देश्य को आगे बढ़ाएगी।








