
पीथमपुर (संवाददाता: संदीप सिंह राणाजी)।
औद्योगिक नगरी पीथमपुर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में इन दिनों सैकड़ों छोटे व्यापारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। म.प्र. गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (संभाग धार) द्वारा आवासीय संपत्तियों में किए जा रहे व्यावसायिक उपयोग को बंद करने के लिए जारी किया गया 5 दिवसीय अंतिम नोटिस अब समाप्त हो चुका है। समय-सीमा खत्म होने के बाद प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है।

जानकारी के अनुसार संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर नियमों का उल्लंघन करने वाले संपत्ति धारकों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन के इस रुख से कॉलोनी के सैकड़ों परिवारों में चिंता और असमंजस का माहौल है।
35 वर्षों की मेहनत और बैंक लोन पर खड़ा हुआ रोजगार
स्थानीय निवासी एवं पूर्व पार्षद तेजराम राठौड़ ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले अधिकांश परिवार निम्न एवं मध्यम आय वर्ग से जुड़े हैं। कई लोगों ने पिछले लगभग 35 वर्षों में अपनी मेहनत, बचत और बैंक ऋण के सहारे घरों के सामने छोटी-छोटी दुकानें स्थापित कीं। इन्हीं दुकानों से उनके परिवारों का पालन-पोषण होता है।
व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने किराना, स्टेशनरी, डेयरी, सिलाई, मरम्मत, चाय-नाश्ता, जनरल स्टोर और अन्य छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए बैंकों से ऋण लिया है। यदि इन दुकानों को बंद कराया गया तो न केवल उनकी आय का स्रोत समाप्त हो जाएगा बल्कि बैंक की किस्तें चुकाना भी मुश्किल हो जाएगा। कई परिवारों ने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति में उनके सामने आर्थिक संकट और बेरोजगारी की समस्या खड़ी हो सकती है।
जनप्रतिनिधियों से लगाई गुहार
कार्रवाई को रोकने और समाधान निकालने की मांग को लेकर प्रभावित व्यापारियों ने कई जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की। महेश बैरागी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री एवं धार जिले के प्रभारी मंत्री को ज्ञापन सौंपकर राहत की मांग की।
इसके अलावा नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि सुरेश पटेल के साथ प्रतिनिधिमंडल ने हाउसिंग बोर्ड कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर से भी मुलाकात कर समस्या रखी और आवश्यक होने पर न्यायालय जाने की बात कही। नगर पालिका उपाध्यक्ष पप्पू आसेलिया ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को भी मामले से अवगत कराया।
वहीं पूर्व पार्षद तेजराम राठौड़ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने धार विधायक नीना विक्रम वर्मा से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। विधायक ने आश्वासन दिया कि वे 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इस विषय को उठाएंगी और प्रभावित परिवारों की आवाज सरकार तक पहुंचाएंगी।
कम्युनिटी हॉल में हुई बैठक, कानूनी लड़ाई की तैयारी

राजनीतिक स्तर पर अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आने के बाद प्रभावित रहवासियों ने कम्युनिटी हॉल में बैठक आयोजित की। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी प्रभावित परिवार एकजुट होकर कानूनी प्रक्रिया अपनाएंगे तथा न्यायालय के माध्यम से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे। व्यापारियों ने कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन वर्षों से चल रहे छोटे व्यवसायों को बंद करने से पहले सरकार को मानवीय और व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।
मुख्यमंत्री से मानवीय समाधान की अपील
प्रभावित परिवारों ने मुख्यमंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे किसी नियम का जानबूझकर उल्लंघन करने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले छोटे व्यापारी हैं। उनका कहना है कि सरकार ऐसा “बीच का रास्ता” निकाले जिससे नियमों का पालन भी हो और वर्षों से चल रहे छोटे व्यवसाय भी सुरक्षित रह सकें।
व्यापारियों का कहना है कि यदि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के कार्रवाई की गई तो सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी और आर्थिक संकट और गहरा जाएगा।
करणी सेना परिवार ने दिया समर्थन
करणी सेना परिवार के जिला अध्यक्ष शिवपाल सिंह गौड़ ने प्रभावित व्यापारियों को अपना समर्थन देते हुए कहा कि करणी सेना परिवार पूरी मजबूती से व्यापारियों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन की आवश्यकता पड़ी तो संगठन हर स्तर पर उनका साथ देगा और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष में सहभागी बनेगा।
अब प्रभावित व्यापारी प्रशासन से राहत की उम्मीद के साथ-साथ न्यायालय में अपनी बात रखने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और न्यायालय की प्रक्रिया इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।





