
भोपाल। मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन बुधवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में किसान राजधानी भोपाल पहुंचे और प्रशासन द्वारा लगाए गए करीब 22 बैरिकेड्स को पार करते हुए मुख्यमंत्री निवास से लगभग एक किलोमीटर पहले तक पहुंच गए। आंदोलन के दौरान कई जगह पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिससे राजधानी में दो दिनों तक यातायात प्रभावित रहा और कई स्कूल भी बंद रखने पड़े।
किसानों की मुख्य मांग मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी और ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करने की थी। लंबे प्रदर्शन और सरकार से वार्ता के बाद राज्य सरकार ने किसानों की दो प्रमुख मांगों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया।
सरकार ने घोषणा की कि अब किसानों की मूंग उपज का 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि 60 प्रतिशत तक समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। इसके साथ ही ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। स्लॉट हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि उनकी मूल मांग 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की है। उनका कहना है कि 60 प्रतिशत खरीदी का निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन जब तक पूरी उपज की खरीदी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक किसानों की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।बुकिंग की अंतिम तिथि भी बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है, जबकि खरीदी की अवधि 20 अगस्त तक बढ़ाई गई है।
आंदोलन के दौरान पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की। कई स्थानों पर स्कूल बसों और भारी वाहनों को सड़क पर खड़ा कर रास्ता रोकने की कोशिश की गई, लेकिन किसान लगातार आगे बढ़ते रहे। देर रात तक चले घटनाक्रम के बाद सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई।
हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि उनकी मूल मांग 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की है। उनका कहना है कि 60 प्रतिशत खरीदी का निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन जब तक पूरी उपज की खरीदी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक किसानों की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।
सरकार का कहना है कि प्रदेश में मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाया गया है और किसानों को राहत देने के लिए यह फैसला लिया गया है। वहीं किसान संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में उनकी शेष मांगों पर भी सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।






