
विदिशा: 2 मिनट की देरी से छूटी NEET परीक्षा, पिता के आंसुओं ने खड़े किए कई सवाल
विदिशा। नीत (NEET) परीक्षा देने पहुंची एक छात्रा को कथित तौर पर परीक्षा केंद्र पर मात्र 2 मिनट की देरी से पहुंचने के कारण प्रवेश नहीं दिया गया। बेटी का एक साल का सपना टूटता देख पिता परीक्षा केंद्र के बाहर फूट-फूटकर रोता रहा और अधिकारियों से गुहार लगाता रहा, लेकिन नियमों के चलते छात्रा को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों को भावुक कर रहा है। मामला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या कुछ मिनटों की देरी के कारण किसी विद्यार्थी के पूरे साल की मेहनत पर पानी फेर देना उचित है?
कहा जाता है कि एक पिता अपने बच्चों को पढ़ाने और उनका भविष्य बनाने के लिए अपना पूरा जीवन लगा देता है। कई परिवार अपनी आर्थिक स्थिति से लड़ते हुए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। कोई कर्ज लेता है, कोई अपनी जमा-पूंजी खर्च करता है, तो कोई अपनी जमीन तक बेच देता है, ताकि उसका बच्चा अपने सपनों को पूरा कर सके।
ऐसे में जब परीक्षा के दिन महज 2 मिनट की देरी के कारण किसी छात्रा को परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया जाता है, तो सिर्फ उस छात्रा का एक साल नहीं, बल्कि उसके माता-पिता की उम्मीदें, सपने और त्याग भी टूट जाते हैं। यह सिर्फ एक परीक्षा छूटने का मामला नहीं है, बल्कि उस संघर्ष की कहानी है जो हर दिन लाखों परिवार अपने बच्चों के भविष्य के लिए करते हैं।
हालांकि परीक्षा की निष्पक्षता और नियमों का पालन आवश्यक है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या विशेष परिस्थितियों में 2 से 5 मिनट की मानवीय छूट का कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए? क्या नियमों के साथ संवेदनशीलता का संतुलन नहीं बनाया जा सकता?
सरकार और संबंधित अधिकारियों से यही सवाल है — क्या कुछ मिनटों की देरी पर बच्चों के भविष्य और उनके माता-पिता के वर्षों के संघर्ष को भी ध्यान में नहीं रखा जाना चाहिए?








