
दिनांक: 15 जुलाई 2026 | बुधवार
हरदा | मुख्य संपादक | करणी सेना न्यूज मध्यप्रदेश
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में बुधवार को किसानों का गुस्सा सड़क पर साफ दिखाई दिया। हजारों की संख्या में किसान अपनी जायज़ मांगों को लेकर इंदौर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतर आए और चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शन इतना बड़ा था कि हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने यातायात को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया।
किसानों का कहना है कि वे महीनों से अपनी समस्याओं को सरकार और प्रशासन के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी कारण मजबूर होकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।
आंदोलन के दौरान कई किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना था कि जब अन्नदाता की मेहनत का सम्मान नहीं होगा, उसकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलेगा और उसे बार-बार अनदेखा किया जाएगा, तब विरोध का यही तरीका बचता है। किसानों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और उनका उद्देश्य केवल अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना है।
किसानों का आरोप है कि इस वर्ष मूंग की अच्छी पैदावार हुई, लेकिन सरकार की खरीदी व्यवस्था किसानों के हित में नहीं है। प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल खरीदी की सीमा तय होने से अधिकांश किसानों की उपज खरीदी से बाहर रह गई है। किसानों की मांग है कि यह सीमा बढ़ाकर 5 क्विंटल प्रति एकड़ की जाए, ताकि मेहनत का उचित लाभ मिल सके।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, दवा, डीजल और सिंचाई पर भारी खर्च होने के बाद भी यदि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा। किसानों ने सरकार से समर्थन मूल्य (MSP) पर शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की।

किसानों की प्रमुख मांगें
मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाए।
प्रति एकड़ खरीदी सीमा 1.20 क्विंटल से बढ़ाकर 5 क्विंटल की जाए।
जिले में खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए।
लंबित फसल बीमा राशि का तत्काल भुगतान किया जाए।
किसानों की उपज की समयबद्ध खरीदी सुनिश्चित की जाए।
किसानों के लिए विशेष आर्थिक राहत पैकेज घोषित किया जाए।
आंदोलन के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं, बल्कि किसानों के हक, सम्मान और भविष्य की लड़ाई है।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा:
“जब तक हमारी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हम सड़क नहीं छोड़ेंगे। जरूरत पड़ी तो आंदोलन और बड़ा किया जाएगा। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।”
किसानों ने प्रदेशभर के अन्नदाताओं से भी आंदोलन में शामिल होने और अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। उनका कहना है कि यदि आज किसान अपने अधिकारों के लिए एकजुट नहीं हुआ, तो आने वाले समय में खेती करना और भी कठिन हो जाएगा।
चक्का जाम के कारण इंदौर-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा। पुलिस और प्रशासन मौके पर मौजूद रहे तथा लोगों की सुविधा के लिए ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों से निकाला गया। प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी रहीं, हालांकि समाचार लिखे जाने तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी।
अब पूरे प्रदेश की नजर हरदा पर टिकी हुई है। यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी फैल सकता है।
करणी सेना न्यूज मध्यप्रदेश किसानों से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रशासन और सरकार की ओर से जैसे ही कोई आधिकारिक निर्णय या घोषणा सामने आएगी, उसकी जानकारी सबसे पहले आप तक पहुंचाई जाएगी।





